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106. sanjeev khudshah - 2008-10-22 18:44:51 |
Chattisgarh se prakashit hone wali is lokpriya patrika per hame garv hai. Asha hai lokpriyata shikhar per pahuchegi.
sanjeev khudshah
bilaspur |
" target=_blank> 105. राजे - 2008-07-20 09:58:04 |
| नवयुग यदि आएगा तो विचार शोधन द्वारा ही, क्रान्ति होगी तो वह लहू और लोहे से नही, विचारो की विचारो से काट द्वारा होगी, समाज का नवनिर्माण होगा तो वह सद् विचारो की स्थापना द्वारा ही संभव होगा | |
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104. vishwajit - 2008-05-17 17:52:58 |
मीडिया जगत में आ रहे बदलाव और तकनीक को लेकर भी सामग्री का प्रकाशन होना जरूरी है। पत्रिका की संपूर्णता के लिए आवश्यक है कि मीडिया प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी लेख दिए जाएं। जिससे सही चीजें सामने आ सकें।
पत्रकारों के लेखों में एक भावनात्मक आवेग रहता है। संभव है मीडिया हाउस के मालिक और प्रबंधक चीजों के ज्यादा अनुभवों के साथ बता पाएं। इससे दोनों पक्ष संपूर्णता में सामने आ सकेंगे।
विश्वजीत प्रताप सिंह,
हुसैनगंज, लखनऊ (उप्र)
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103. ajit - 2008-05-17 17:52:23 |
पत्रिका मीडिया में कार्यरत सब पक्षों, सब विचारों एवं प्रभावों को अवसर दे रही यह कम बड़ी बात नहीं है। देश के तमाम महत्वपूर्ण पत्रकारों को एक मंच पर लाकर आप बड़ा काम कर रहे हैं।
कहीं तो मीडिया पर विमर्श हो रहा है, यह सुख और संतोष की बात है।
कम समय में पत्रिका एक अनिवार्य जरूरत बन गयी है। पत्रकारों और पत्रकारिता के छात्रों के अलावा हर चिंतनशील नागरिक के लिए इसमें सामग्री है।
अजीत कुमार,
बुध्द मार्ग,
पटना (बिहार)
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102. ranjana - 2008-05-17 17:51:49 |
मीडिया विमर्श ने कम ही समय में अपनी खास पहचान बना ली है। अब तो इसके हर अंक का इंतजार रहता है। मीडिया पर केंद्रित यह सबसे लोकप्रिय पत्रिका बन गयी है।
रंजना यादव, लहुराबीर,
वाराणसी, (उप्र)
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101. kumar - 2008-05-17 17:51:18 |
इतनी अच्छी हिंदी पत्रिका में कुछ पेज कई अंकों में अंग्रेजी में होते हैं। आपकी पत्रिका मुख्यत; हिंदी भाषियों के बीच लोकप्रिय है। फिर कुछ पन्ने अंग्रेजी के डालने की मजबूरी क्या है? पत्रिका में नाहक ही अंग्रेजी की सामग्री छापने का मोह मत पालिए।
कुमार विजय सिंह
नालासोपारा (पूर्व), ठाणे
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