|
90. - 2008-04-16 17:32:23 |
भारत एक लोकतांत्रिक देश है। हमारे देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है, लेकिन जब मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर ही सवाल उठने लगे हों तो क्या कहा जाए। मीडिया कितना स्वतंत्र है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि पत्रकारों व रिपोर्टरों पर लगातार जानलेवा हमले हो रहे हैं। जिस तरह मीडियाकर्मियों को आए दिन निशाना बनाया जा रहा है उससे उसकी स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा होता है। मीडिया विमर्श के अंक देखकर भरोसा होता है कि एक नई जागरूकता आएगी।
- सोनू सुमन प्रताप
मीडिया विंग, आई.आई.टी.एच.ई., फरीदाबाद (हरियाणा)
|
|
89. - 2008-04-16 17:32:04 |
मीडिया विमर्श ने पूरे देश में बहुत कम समय में अच्छी ख्याति अर्जित की है। पत्रकारिता के सभी माध्यमों में रेडियो का महत्वपूर्ण स्थान है। रेडियो के श्रोता अन्य माध्यमों के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा है इसलिए रेडियो पर उनकी निर्भरता बहुत महत्वपूर्ण है। रेडियो पर केंद्रित मीडिया विमर्श का अंक इस पूरे परिदृश्य पर सार्थक प्रकाश डालता है।
- रामपाल त्रिपाठी
मानिकपुर, चित्रकूट (उत्तरप्रदेश)
|
|
88. - 2008-04-16 17:31:47 |
यह अपने किस्म की सर्वथा अनूठी और विशिष्ट पत्रिका है। रचनाएं पठनीय और स्तरीय हैं। कुशल संपादन हेतु हार्दिक बधाई।
- मांघीलाल यादव
टिकरीपारा, गंडई, पंडरिया,
जिला-राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
|
|
87. - 2008-04-16 17:31:22 |
मीडिया विमर्श पढ़ने का मौका मिल रहा है। इसके शोधपरक लेख संग्रहणीय होते जा रहे हैं। खासकर इसके विशेषांक।
- संजय कुमार
आकाशवाणी, पटना (बिहार)
|
|
86. - 2008-04-16 17:31:06 |
मीडिया विमर्श के वार्षिकांक की सबसे बड़ी उपलब्धि श्री प्रभु जोशी का आलेख है। उन्होंने बड़े साहस के साथ कण्डोम प्रमोशन कार्यक्रम की असलियत को सामने रखा है वह प्रभावित करता है। आज इतने साहस के साथ बात करने वाले लोग कितने बचे हैं। उनका लेख एक साहसिक प्रयास है। पर क्या सरकार उनके द्वारा उठाये गए मुद्दों पर ध्यान देगी? मुझे नहीं लगता कि सरकारों में अब कोई संवेदना बची है। सत्ता की राजनीति हमारे सरोकारों को बहुत भोथरा बना चुकी है।
- अजीम अलवी
अमीनाबाद, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
|
|
85. - 2008-04-16 17:30:40 |
सिर्फ पांच अंकों में ही पत्रिका ने जो जादू किया है कि अब इसके हर अंक का इंतजार रहता है। बेहतर होगा कि अब इसे मासिक पत्रिका के रूप में प्रकाशित किया जाये। मीडिया के तमाम संदर्भों पर आप जैसी सामग्री प्रकाशित कर रहे हैं वह आंखें खोलनी वाली है। उम्मीद है मीडिया विमर्श आगे भी यही तेवर बनाए रखेगी।
- विजय कुमार
लालकुंआ, लखनऊ (उत्तरप्रदेश)
|
|
84. - 2008-04-16 17:30:13 |
रेडियो की वापसी पर केंद्रित मीडिया विमर्श का नया अंक बहुत प्रभावशाली है। रेडियो पर इतनी अच्छी सामग्री का संकलन एवं संग्रहण बहुत ही अच्छा लगा। मुझे उम्मीद है यह पत्रिका बहुत जल्द ही अपनी राष्ट्रीय पहचान बना लेगी।
- अमित सिंह
कोपरखैरणे, नवी मुंबई (महाराष्ट्र)
|
|
83. - 2008-04-16 17:29:47 |
मीडिया विमर्श के रेडियो की वापसी पर केंद्रित अंक को पढ़कर बहुत प्रसन्नता हुई। निश्चित ही यह अंक रेडियो को वापस लाएगा। यह अंक बहुत ही सूचनाप्रद एवं उपयोगी है।
- अजीत कुमार
शोध छात्र ; आईआईटी,
खड़गपुर (पश्चिम बंगाल)
|
|
82. - 2008-04-16 17:29:23 |
मीडिया विमर्श का वार्षिकांक अच्छा लगा। यह अंक रेडियो के इतिहास पर एक महत्वपूर्ण योगदान है। सभी लेखकों के आलेख अच्छे लगे।
- बृजमोहन गुप्ता
पूर्व केंद्र निदेशक, आकाशवाणी
एचआईजी-107, साथी अपार्टमेंट्स, सेक्टर-9, रोहिणी, नई दिल्ली
|
|
81. - 2008-04-16 17:28:54 |
मीडिया विमर्श के वार्षिकांक को देखकर बहुत अच्छा लगा। आप सब इस पत्रिका के माध्यम से बहुत ही अच्छा एवं सार्थक प्रयास कर रहे हैं।
- विनोद रेंगनिया
सलाहकार संपादक ; पूर्वोदय, गुवाहाटी
|
|
|